राजस्व दिवस 15 अक्टूबर के रूप में मनाया जायेगा- राजस्व मंत्री श्री हरीश चौधरी

राजस्व दिवस 15 अक्टूबर के रूप में मनाया जायेगा- राजस्व मंत्री श्री हरीश चौधरी

जयपुर, 28 फरवरी। राजस्व मंत्री श्री हरीश चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि राजस्व विभाग की ओर से भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसमें ऑनलाईन नकल (प्रतिलिपि), ऑनलाईन गिरदावरी, ऑनलाईन नामान्तरकरण मॉडर्न रिकॉर्ड रूम, सर्वे-रिसर्वे आदि कार्य प्रमुख हैं। इसी प्रकार तरमीम, नामान्तरकरण एवं अपवादित खातों के प्रकरणों का प्रमुखता से निस्तारण किया गया है। उन्होंने 15 अक्टूबर को राजस्व दिवस के रूप में मनाने की सदन में घोषणा की। 
 

राजस्व मंत्री ने प्रदेश के किसानों को साधुवाद देते हुए कहा कि टिड्डी के आक्रमणों को रोकने में राज्य सरकार के साथ किसानों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि टिड्डी आक्रमण की समस्या अभी भी बनी हुई है क्योंकि लाल सागर में टिड्डियों के दल के आगमन की संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के माध्यम से हम सभी को यूएनओ तक अपनी बात पहुंचानी होगी। 
 

उन्होंने इसके साथ ही प्रशासनिक क्षेत्र में लीडरशिप की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं सदन को अवगत कराया कि चारागाह के संबंध में राज्य सरकार जल्दी फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा किसानों पर लगाये जाने वाले राईडर उन्हें हतोत्साहित करते है। जबकि उद्योगपतियों के लिए औद्योगिकी इकाईयां स्थापित करने के लिए विशेष नियम बना कर राहत प्रदान की जाती है।  
 

श्री चौधरी शुक्रवार को विधानसभा में मांग संख्या 8 (राजस्व) की अनुदान मांगों पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने राजस्व की 8 अरब, 84 करोड़ 86 लाख 91 हजार रूपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी।

 

उन्होंने कहा कि जब से हमारी सरकार बनी है मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य की जनता के सर्वांगीण विकास हेतु जनहित के कार्य कर रही है। इसी सन्दर्भ में राजस्व विभाग द्वारा आमजन को बार-बार राजस्व कार्यालयों में चक्कर नहीं काटने पड़े, इसके लिए राष्ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत भू-अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसमें ऑनलाईन नकल (प्रतिलिपि), ऑनलाईन गिरदावरी, ऑनलाईन नामान्तरकरण मॉडर्न रिकॉर्ड रूम, सर्वे-रिसर्वे आदि कार्य प्रमुख हैं।

 

श्री चौधरी ने बताया कि 13 महीनों में हमारी सरकार द्वारा प्राथमिकता से लैण्ड रिकॉर्ड का कम्प्यूटराईजेशन किया गया है। उन्होंन बताया कि जनवरी 2019 तक 13,12,267 तरमीम थी जिसमें आज तक 5,81,331 तरमीम और जुड़ गई और कुल 18,93,598 तरमीम हो गई जिनमें से आज तक 16,52,554 निस्तारित कर दी गई हैं। अभी 2,41,044 तरमीम शेष हैं जिनका निस्तारण किया जाना बाकी हैं। इसी प्रकार जनवरी 2019 तक 2,33,630 नामान्तरकरण के प्रकरण थे जिनमें से आज तक 4,434 नामान्तरकरण के प्रकरण और जुड़ गए  और कुल 2,38,064 नामान्तरकरण के प्रकरण हो गए जिनमें से आज तक 2,28,122 निस्तारित कर दिए गए हैं। अभी 9,942 नामान्तरकरण के प्रकरण शेष हैं जिनका निस्तारण किया जाना बाकी है।

 

राजस्व मंत्री ने बताया कि  प्रदेश में राजस्व विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण परिवर्तनात्मक कदम राजस्व भू-अभिलेख को हर दृष्टि से पारदर्शी एवं अद्यतन किये जाने के लिए राज्य की कुल 338 तहसीलों में से 192 तहसीलों को ऑनलाईन अधिसूचित किया जा चुका है। शेष 146 तहसीलों में भू-अभिलेख को शीघ्रातिशीघ्र ऑनलाईन किये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। यह कदम आम जन को प्रत्यक्ष रूप से सकारात्मक लाभ पहुँचाने की क्षमता रखता है । राजस्व मंत्री ने बताया कि  सभी राजस्व नक्शे डिजिटलाईज्ड कर ई-धरती पोर्टल पर भू नक्शा सॉफ्टवेयर द्वारा अपलोड कर आमजन को यह सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है कि वह जमाबन्दी के साथ अद्यतन भू-नक्शे की ऑनलाईन प्रति प्राप्त कर सके। हाल ही में राजस्व विभाग द्वारा जमाबंदी एवं भू नक्शों की नकल कम्प्यूटर के माध्यम से ई-साईन द्वारा प्रमाणित प्राप्त करने की सुविधा प्रारम्भ की गई है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार ऑनलाईन गिरदावरी किये जाने हेतु भू प्रबंध विभाग द्वारा राजस्व अधिकारी मोबाईल एप्लीकेशन विकसित किया गया है जिसके माध्यम से प्रदेश की 192 ऑनलाईन तहसीलों में रबी मौसम की फसल गिरदावरी को ऑनलाईन दर्ज कराया जा रहा है एवं इस प्रकार दर्ज गिरदावरी की ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाईन गिरदावरी की नकलें जारी की जा रही है।  इसी  प्रकार नामान्तरकरण की प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी एवं कालबाधित करते हुये आरपीजी व तहसीलदार स्वयं के यूजर आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से नामान्तरकरण लॉक करेंगें एवं लॉक होते ही नामान्तरकरण का अमल जमाबंदी में दर्शाया जायेगा। इसमें एक अहम पहलू यह है कि विभाजन की नामान्तरकरण की प्रक्रिया हेतु तरमीम की प्रक्रिया भी नामान्तरकरण के साथ पूर्ण किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीयन दस्तावेजों के आधार पर स्वतः नामान्तरकरण की कार्यवाही पायलट आधार पर तहसील-चौमूं, जिला-जयपुर में शुरू की जा चुकी है। 

 

राजस्व मंत्री ने बताया कि आम जनता को निकट भविष्य में नामान्तरकरण का ऑनलाईन आवेदन प्रस्तुत करने की सुविधा उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में गत बजट सत्र के दौरान राजस्व विभाग की अनुदान की मांगों का जवाब देते समय आश्वासन दिया गया था, जिसकी पालना में राज्य सरकार द्वारा समस्त 192 ऑनलाईन तहसीलों में एनआईसी के माध्यम से सॉफ्टवेयर का विकास किया जाकर आम जनता को सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। इसी प्रकार कृषकों को होने वाली अनावश्यक परेशानी से निजात दिलाने के उद्देश्य से कृषि ऋण पोर्टल लॉन्च किया जाकर काश्तकार के लिए बैंक से ऋण लेना अत्यधिक सुगम बना दिया है। इसी प्रकार डिजिटल इण्डिया लैण्ड रिकॉर्ड मॉडर्नाईजेशन प्रोग्राम के अन्तर्गत राज्य की समस्त तहसीलों में आधुनिक भू-अभिलेख कक्ष स्थापित किये जा रहे हैं। 

 

श्री हरीश चौधरी ने बताया कि जैसा कि विदित है राजस्व अभिलेखों, राजस्व नक्शों एवं मौके की वर्तमान स्थितियों में निरन्तर परिवर्तन एक सतत् प्रक्रिया है। ऎसे में राजस्व अभिलेखों, राजस्व नक्शों एवं मौके की स्थिति हर समय अद्यतन रहे इस हेतु सर्वे/रिसर्वे का कार्य हाथ में लिया गया जो प्रक्रियाधीन है। एक बार यह कार्य पूर्ण होने के उपरान्त आने वाले सैकड़ों वषोर्ं तक काश्तकार लाभान्वित होंगे तथा सीमाज्ञान सम्बन्धी किसी विवाद का इस कार्यक्रम के अन्तर्गत स्थापित ग्राउण्ड कण्ट्रोल नेटवर्क की सहायता से सुगमतापूर्वक एवं त्रुटिरहित समाधान किया जा सकेगा।

 

उन्होंने बताया कि डिजिटल इण्डिया लैण्ड रिकॉर्ड मॉडर्नाईजेशन प्रोग्राम के अन्तर्गत राज्य के 529 उप पंजीयक कार्यालयों में से 527 कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण करवाया जा चुका है जिसके तहत ई-पंजीयन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पंजीयन कार्य किया जा रहा है। जनवरी, 2019 तक राज्य में 67 तहसीलों को ऑनलाईन कराया जा सका था, इसके उपरान्त 125 तहसीलों के रिकॉर्ड को डिजिटल इण्डिया लैण्ड रिकॉर्ड मॉडर्नाईजेशन प्रोग्राम योजना में ऑनलाईन करवाया जा चुका है।